देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सोमवार को राज्य सचिवालय के एपीजे अब्दुल कलाम भवन में उत्तराखंड भाषा संस्थान की आम सभा और प्रबंध कार्यकारिणी समिति की बैठक में भाग ले रहे हैं । रविवार को सीएम धामी ने हरिद्वार जिले के लिब्बरहेड़ी में एक रोड शो और जन संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लिया और इस बात की पुष्टि की कि उनका राजनीतिक दृष्टिकोण लोगों और जमीन के साथ उनके मजबूत जुड़ाव पर आधारित है।
इस दौरान सीएम धामी ने मंच से जनता को संबोधित किया और ट्रैक्टर चलाकर राज्य के किसानों के प्रति आभार जताया। विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री ने पारंपरिक मंच से उतरकर ट्रैक्टर की स्टीयरिंग संभाली और भीड़ में उत्साह की लहर दौड़ गई। सीएम धामी ने कहा, “किसान हमारे देश की रीढ़ हैं।
जब मैं ट्रैक्टर चलाता हूं तो यह सिर्फ ड्राइव नहीं बल्कि हमारे अन्नदाता भाइयों की मेहनत को सलाम करने का एक छोटा सा प्रयास होता है। इस दृश्य ने यह स्पष्ट कर दिया कि मुख्यमंत्री का नेतृत्व योजनाओं और घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर उतरकर भागीदार बनना उनकी शैली का अभिन्न अंग है।
सीएम धामी का लिब्बरहेड़ी दौरा उत्तराखंड में हाल ही में लागू किए गए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के समर्थन के लिए जनता का आभार जताने और इस ऐतिहासिक कानून के महत्व को जनता तक पहुंचाने के लिए था। धामी ने कहा, “यूसीसी न तो किसी धर्म के खिलाफ है और न ही किसी वर्ग के खिलाफ। यह समानता, न्याय और पारदर्शिता का मूल आधार है। यही सपना बाबा साहब डॉ. अंबेडकर ने संविधान बनाते समय देखा था। यह कानून राज्य के नागरिकों की एकता, भाईचारे और समान अधिकारों की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।”
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए आधुनिक खेती के लिए तकनीकी प्रशिक्षण, युवा उद्यमियों के लिए स्टार्टअप योजना, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, सड़कों और स्वास्थ्य सेवाओं के उन्नयन समेत राज्य सरकार की विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य सिर्फ विकास करना नहीं बल्कि विकास को हर गांव और हर व्यक्ति तक पहुंचाना है।” लिब्बरहेड़ी के इस दौरे ने साबित कर दिया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का नेतृत्व प्रशासनिक सीमाओं तक सीमित नहीं है। वे एक ऐसे जननेता हैं जो ज़मीन पर लोगों की बात सुनते हैं और उसमें भाग लेते हैं। ट्रैक्टर यात्रा हो या समान नागरिक संहिता पर जनसंवाद, हर पहलू से पता चलता है कि उत्तराखंड एक नए युग की ओर बढ़ रहा है, जहाँ विकास और संवेदनशीलता साथ-साथ चलते हैं।
